रेडियो मिर्ची की दिलचस्प कहानी
एफएम रेडियो की दुनिया में मनोरंजन का बेहतर विकल्प बन
कर आया रेडियो मिर्ची। इसके सफर से जुड़े कुछ मोड़ की दास्तां सुना रही हैं शुचि बंसल। शुचि का यह आलेख दैनिक बिजनेस स्टैंडर्ड में 2 जून, 2008 को प्रकाशित हुआ था। साभार हम उसका संपादित अंश यहां पेश कर रहे हैं।
वह बड़ा ही अजीब पल था, यह कहते हुए एंटरटेनमेंट नेटवर्क इंडिया लिमिटेड (ईएनआईएल) के प्रबंध निदेशक एपीपारिगी पुरानी यादों में खो जाते हैं। बात 2001 की है जब टाइम्स ग्रुप की रेडियो कंपनी ईएनआईएल ने अपना पहला स्टेशन इंदौर में लॉन्च किया था। पारिगी बताते हैं, 'लॉन्च के अवसर पर रेडियो मिर्ची ब्रांड नाम के लिए सीईओ के तौर पर लोग मुझे बधाई दे रहे थे।
मैं परेशानी भी महसूस कर रहा था क्योंकि यह ब्रांड नाम टाइम्स समूह के प्रबंध निदेशक विनीत जैन ने दिया था। मजे की बात यह कि हम लोगों ने इस पर कड़ा ऐतराज किया था।' पारिगी कोई एनआईएल और बेनेट, कोलमैन ऐंड कंपनी के बोर्ड में बड़ी भूमिका दी गई है। वह समूह के लिए महत्त्वपूर्ण निवेशक भी प्रबंधन करते हैं। पारिगी यह स्वीकार करते हैं कि रेडियो टीम में कोई भी ब्रांडिंग के बारे में आश्वस्त नहीं था। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि इंदौर में यह नाम एकदम लोकप्रिय हो गया। रेडियो मिर्ची निजी एफएम रेडियो श्रेणी में शुरुआती लाभ उठाने में भी सफल रहा।
प्रतिस्पर्धी ब्रांड-रेडियो सिटी की मुख्य कार्यकारी अपूर्वा पुरोहित इससे ज्यादा प्रभावित नहीं हैं। वह कहती हैं, 'यह निर्भर करता है कि आप लाभ को किस तरह से परिभाषित करते हैं।' उन्होंने कहा कि एफएम नेटवर्क ने इस वर्ष नए बाजारों में प्रवेश किया है। इन बाजारों में लाभ की स्थिति हासिल करने में दो से तीन साल लग सकते हैं। रेडियो कंसल्टेंट सुनील कुमार कहते हैं, 'कंपनी ने एक जन माध्यम तैयार किया है जिसकी दूसरों ने नकल की। इसने अपने स्टेशनों के कार्यक्रमों का स्थानीयकरण किया और उन्हें स्तर का बनाया। अंतत: कंपनी अपनी बेहतरीन प्रतिभाओं को बनाए रखने में सफल रही है।'
जब पारिगी सीईओ थे तो उन्होंने बगैर किसी मीडिया अनुभव के एग्जीक्यूटिव्स की एक टीम बनाने का फैसला किया। वह खुद 2000 में बीपीएल के मोबाइल फोन ब्रांड को विकसित कर रेडियो मिर्ची में आए। मौजूदा सीईओ प्रशांत पांडे सौन्दर्य प्रसाधन निर्माता रेवलॉन से जुड़े रहे हैं। पांडे कहते हैं, 'हम घिसे पिटे ज्ञान वाले लोगों को पसंद नहीं करते। हम नई अवधारणा चाहते हैं।' कार्यालयों को चटकीले लाल और हरे रंग के इस्तेमाल के साथ इस तरह सजाया गया है जहां कैम्पस की सी अनुभूति हो। पांडे कहते हैं, 'हम मौज मस्ती के माहौल को बढ़ावा देते हैं। कार्यालय में शोरगुल और जोश अधिक होता है। हम इसे बरकरार रखने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।' रेडियो मिर्ची भले ही 'हॉट' लगता है लेकिन लोगों के प्रति इसका रुख 'शांत' है।
उसने इंटरव्यू के लिए बुलाए गए तकरीबन 100 लोगों के लिए पार्टी आयोजित की हालांकि रेडियो जॉकी के रूप में उनका चयन नहीं हुआ। चुने गए लोगों को सख्त ट्रेनिंग दी जाती है। 2007 में जब 22 स्टेशन शुरू किए गए तो मिर्ची ने एमआईसीए में प्रशिक्षण अकादमी खोली जो कि मुद्रा का एडवरटाइजिंग इंस्टीटयूट है। जॉब रोटेशन, प्रमोशन और ट्रेनिंग के साथ कंपनी अपनी बेहतरीन प्रतिभाओं को अपने यहां रोकने में सफल रही है। एक बार जब दो क्रिएटिव हेड आपस में भिड़ गए थे, तो उन्हें समस्या के समाधान के लिए एक दिन के लिए कमरे में बंद कर दिया गया था। शीर्ष 120 अधिकारियों में से महज चार या पांच ने ही कंपनी को अलविदा कहा है। पांडे बताते हैं, 'कंपनी में नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की दर मात्र 10 प्रतिशत है जबकि उद्योग मानक के हिसाब से यह 40 फीसदी है।'