
-अतुल अग्रवाल
आईबीएन7 और आईबीएन-लोकमत पर हमला करने वाले शिवसैनिक कायर हैं। निकम्मे हैं और बाल ठाकरे इन बुजदिलों के नेता। इन गुन्डों ने जिस तरह से आईबीएन-18 नेटवर्क के मुंबई और पुणे दफ्तरों पर जिस काली करतूत को अंजाम दिया उससे इतना तो साफ है कि ये लोग महाराष्ट्र का विकास करने के लायक हैं ही नहीं। इसीलिए जनता ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इन्हे नकार दिया था। आईबीएन7 के मुंबई दफ्तर पर जिस बेशर्मी का मुज़ाहिरा इन गुंडों ने किया वो शर्मनाक ही नहीं, घृणित भी है। आखिर कोई राजनीतिक दल ऐसी भौंडी हरकत कैसे कर सकता है? सबसे ज्यादा हैरानी में डाला शिवसेना सांसद और मुखपत्र सामना के संपादक संजय राउत के बयान ने। हमले के तुरंत बाद संजय राउत का बयान आया। राउत ने कहा कि आईबीएन नेटवर्क के चैनल लगातार शिवसेना विरोधी खबरें दिखातें हैं। बाल ठाकरे के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं जिसे शिवसेना बर्दाश्त नहीं करेगी। राउत ने शिवसेना की तरफ से हमले की ज़िम्मेदारी ली और इसे सही करार दिया। यानी चोरी और सीना जोरी। अरे राउत साहब, क्या शर्म नहीं आती है आपको जो इन गुन्डों को बढ़ावा दे रहे हैं? कायदे से तोऐसे 'गुन्डे सांसद' को संसद में घुसने तक का अधिकार नहीं होना चाहिए।
मुंबई में आईबीएन7 के दफ्तर पर शिव सैनिकों का हमला
मुंबई। अपने सुप्रीमो बाल ठाकरे के खिलाफ खबर दिखाए जाने से नाराज शिवसैनिक गुंडागर्दी पर उतर आए और उन्होंने मुंबई में टीवी नेटवर्क18 के दफ्तर में आईबीएन7 और ग्रुप के ही मराठी चैनल आईबीएन लोकमत के दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ और मारपीट की। दोपहर करीब चार बजे दर्जनों कार्यकर्ता शिवसेना की जय-जयकार करते हुए दफ्तर में घुस आए। ये लोग हाथों में रॉड, बैट व डंडे लिए हुए थे। आते ही उन्होंने तोड़फोड़ शुरूकर दी। रोकने पर इन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ मारपीट की। इस मारपीट में कई लोग घायल हो गए। मुंबई के विक्रोली में नेटवर्क-18 का दफ्तर है जिसमें आईबीएन7 और ग्रुप के मराठी चैनल आईबीएन लोकमत का दफ्तर है। इसी दफ्तर पर शिवसैनिकों ने हमला किया। खबर पाकरपुलिस भी मौके पर पहुंच गई। आईबीएन7 के कर्मचारियों ने ही मौके पर कुछ गुंडों को दबोच लिया। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है।आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष ने कहा कि आखिरकार महाराष्ट्र का प्रशासन कर क्या रहा है। मीडिया पर हमला लोकतंत्र पर हमला है क्योंकि वे नहीं चाहते कि लोगों को असलियत पता चले। वो नहीं चाहते कि मीडिया उनके किसी कदम के खिलाफ आवाज उठाए। लेकिन हम न ही डरेंगे और ना ही डिगेंगे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने घटना कोदुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने पुलिस कमिश्नर को आदेश दे दिए हैं कि हमलावरों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए।
चैनल के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष ने तीखे शब्दों में शिवसेना की निंदा की। बकौल आशुतोष, "संजय राउत भले ही खुद को पत्रकार कहते रहे हों लेकिन मैंने उन्हे पत्रकार माना नहीं है। ऐसे लोगों के ऊपर मुझे शर्म आती है। ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। शिवसेना हिंसा को बढ़ावा देती है और ऐसी पार्टी की मान्यता रद्द होनी चाहिए। राज ठाकरे ने जिस तरह से शिवसेना के पैरों तले ज़मीन खींच ली उससे शिवसेना बौखलाई हुई है। इस हमले के पीछे गहरी साज़िश है। ये हमला शिवसेना, बाल ठाकरे और संजय राऊत की हताशा है। ऐसे हमले मराठियों को कभी बर्दाश्त नहीं होगें। शिवसेना को मराठियों ने नकार दिया है इसीलिए चौथे नंबर की पार्टी शिवसेना ऐसी काली करतूतें कर रही है। महाराष्ट्र की संस्कृति में बाल ठाकरे और शिवसेना की कोई जगह नहीं है।"
ठीक इसी वक्त आईबीएन नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ राजदीप सरदेसाई सीएनएन-आईबीएन पर लाइव थे। उनके साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चाह्वाण लाइव चैट पर थे। राजदीप ने सीधे-सीधे मुख्यमंत्री से पूछा कि कब इस हमले के रिंगलीडर पकड़े जाएंगे? मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्रवाई हो रही है। 7 आरोपी पकड़े गए हैं। इस पर राजदीप ने मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर पूछा कि जो पकड़े गए हैं वो कार्यकर्ता हैं लेकिन आरोपी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई कब होगी और अभी तक क्यों नहीं होगी? ये सवाल पूछते वक्त राजदीप के तेवर बेहद तल्ख हो चुके थे। राजदीप ने शिवसेना समेत राज्य सरकार की कार्य प्रणाली को भी आड़े हाथों लिया। वो भी मुख्यमंत्री के सामने। मुख्यमंत्री के पास कोई ठोस जवाब नहीं था सिवाय आश्वासनों के। वो सिर्फ राजदीप के बाउंसर झेल रहे थे। राजदीप ने मुख्यमंत्री से हमलावर गुंडों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आव्हान करते हुए एक बहुत अहम सवाल उठाया। सवाल ये कि जब ये तस्वीरें कई अंतर्राष्ट्रीय चैनलों पर चलेंगी तो प्रदेश के बारे में कैसी छवि बनेगी?
ज़ाहिरा तौर पर ये सवाल बहुत अहम है। हमें ये तय करना होगा कि आखिर कैसा प्रदेश और देश चाहते हैं हम? क्या इन राजनीतिक गुंडों का कहर हम कभी खत्म नहीं कर पाएंगे? क्यों ये गुंडे पनपते जा रहे हैं? क्या राज्य सरकारें हीं ऐसे गुंडों को पलने-पोसने का मौका देती हैं? आखिर क्यों? क्यों हुआ आईबीएन नेटवर्क के दफ्तर पर हमला? क्यों नहीं पकड़े गए हैं बड़े नेता?आईबीएन लोकमत के संपादक निखिल वागले ने आईबीएन7 पर लाइव बातचीत के दौरान कहा, "बालठाकरे की शिवसेना पागल हो गई है, चुनाव हार गई है इसीलिए हताशा में ऐसा कुकर्म कर रही है। वागले ने कहा कि ऐसे दलों की मान्यता रद्द होनी चाहिए और ऐसे गुंडों को सलाखों के पीछे भेज देना चाहिए।"
आईबीएन7, सीएनएन-आईबीएन और आईबीएन-लोकमत चैनलों पर ये ख़बर डंके की चोट पर चलाई जाती रही। उसके बाद कुछ चैनलों पर भी चली खबर। कहीं ज्यादा कहीं कम। शाम सात बजे स्टार न्यूजके बुलेटिन में एंकर किशोर आजवाणी ने तीखे शब्दों में इस हमले की निंदा की। चैनल ने सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी का बयान भी चलाया जिसमें अंबिका सोनी ने ऐसे गुंडों को तुरंत पकड़ने और इन्हे बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की ज़ररूत बताई। आजतक और इंडिया टीवी ने भी खबर चलाई। न्यूज़24, सहारा समय और एनडीटीवी ने भी आईबीएन7 पर हुए हमले की भर्त्सना की और ठाकरे के गुंडों को जेल भेजने की पुरज़ोर मांग की।
कुल मिलाकर, अब पानी सर से ऊपर चला गया है। मीडिया वालों को 'निरीह' और 'सॉफ्ट टारगेट' समझ कर लतियाने वालों पर डंडा करने की ज़रूरत आन पड़ी है। 'जस का तस' की तर्ज पर इन सफेदपोश नेताओं और इनके गुंडों को इन्ही की भाषा में जवाब देने का वक्त आ गया है। (लेखक टीवी पत्रकार हैं)
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