बीबीसी ब्रिटेन का सरकारी मीडिया है। सरकार के पैसों पर चलता है। कहा भी जाता है कि किसी देश का सरकारी मीडिया उसकी सोच उसकी संस्कृति का 'आईना' होता है। उसी आईने का एहसास करा रही है बीबीसी हिंदी की यह खबर।
-रवींद्र रंजन
बीबीसी हिंदी डॉट कॉम में प्रकाशित इस रिपोर्ट में किसी रिपोर्टर का नाम तो नहीं है, लेकिन जिसने भी इस खबर को लिखा है उसके हाथ चूम लेने को जी चाहता है। यकीन मानिए मैंने तो जबसे ओसामा बिन लादेन जैसी 'महान' शख्सियत के बारे में ये रिपोर्ट पढ़ी है और बीबीसी हिंदी की वेबसाइट पर सजी 'उनकी' तस्वीरों को देखा है तभी से मैं बीबीसी की पत्रकारिता पर अभिभूत हूं। खबर का शीर्षक देखकर ही ओसामा की 'महानता' का एहसास हो जाता है। शीर्षक है- 'क्या ऎसे दिखते होंगे लादेन?' आप समझ सकते हैं कि लादेन बीबीसी के लिए कितनी 'सम्मानित' शख्सियत हैं। आगे की पंक्ति पर गौर फरमाएं। रिपोर्टर लिखता है-ख़ुफ़िया एजेंसियाँ वर्षों से ये दावा कर रही हैं कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर किसी क़बायली इलाक़े में छिपे हुए हैं। वाकई दुनिया के सबसे बड़े और खतरनाक आतंकी के लिए इतना 'आदर भाव' बीबीसी के संपादक के 'दिल में' ही हो सकता है। बीबीसी हिंदी की संपादक सलमा जैदी इस 'लोकतांत्रिक' सोच के लिए वाकई बधाई की हकदार हैं।
आगे की चंद और पंक्तियों पर भी गौर करें-'ये तस्वीर लादेन की वास्तविक तस्वीर नहीं, बल्कि डिजिटल तकनीक से बनाई गई तस्वीर है और इस तस्वीर में ये दिखाने की कोशिश की गई है कि इस समय लादेन कैसे दिखते होंगे।' खबर पढ़कर आपको कहीं भी ये नहीं महसूस होगा कि ओसामा बिन लादेन दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकवादी है। खास बात यह भी है कि पूरी रिपोर्ट में लादेन के लिए कहीं भी आतंकवादी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। शायद बीबीसी के संपादक की नजर में लादेन भी उतनी सम्मानित 'हस्ती' हैं जितने कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री। इस खबर को पढ़ने के बाद शायद पत्रकारों को खबर लिखने का सही तरीका बीबीसी से सीखना होगा। कम से कम मुझे तो ऎसा ही लगता है।
अब बीबीसी हिंदी डॉट कॉम की एक और खबर पर गौर करें। खबर का शीर्षक है-'घायल हो गए हैं हकीमुल्ला।' दुनिया जानती है कि हकीमुल्ला तालिबान का एक खतरनाक आतंकवादी है। लेकिन बीबीसी हकीमुल्ला के बारे में खबर लिखते हुए उनके सम्मान का खास खयाल रखता है। खबर का पहला पैरा है-पाकिस्तान में तालेबान प्रवक्ता ने स्वीकार किया है कि गुरुवार को हुए अमरीकी ड्रोन हमले में उनके नेता हकीमुल्लाह महसूद घायल हो गए हैं। इस हमले में हकीमुल्लाह महसूद के मारे जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं लेकिन तालेबान ने दावा किया था कि वे बच निकलने में क़ामयाब हुए हैं। खबर के एक और पैराग्राफ पर नजर डालिए औऱ खुद फैसला कीजिए कि बीबीसी की नजर में आतंकवादी कितने सम्मानित हैं।....उधर अधिकारियों ने यह भी दावा किया है कि नौ जनवरी को हुए मिसाइल हमले में एक प्रमुख तालेबान नेता जमाल सईद अब्दुल रहीम की मौत हो गई है। जमाल सईद उन चरमपंथियों में से थे जिसकी अमरीकी केंद्रीय जाँच एजेंसी एफ़बीआई को सबसे अधिक तलाश है. उन पर 50 लाख डॉलर का ईनाम था. आरोप है कि 1986 में पैन अमरीकन वर्ल्ड एयरवेज़ के एक विमान के अपहरण में उनका हाथ था।रोकना ही होगा अखबारों के इस 'काले धंधे' को
जारी है अखबारों में 'मिलावट' के खिलाफ मुहिम
अब पानी सिर से ऊपर चला गया है
मत पीटिए मीडिया के 'प्रोफेशनल' होने का ढिंढोरा
खबर लहरिया को यूनेस्को सम्मान
मीडिया में नौकरी दिलाने वालों से सावधान
खबरें जाएं भाड़ में, मुनाफा तो मनोरंजन में है
पत्रकार बेचारा, काम के बोझ का मारा
पांच मंडल के पत्रकारों को मान्यता की हरी झंडी
अब न्यूज चैनल की 'दुकान' खोलना आसान नहीं
क्यों नहीं कर पाए सच का सामना?
दोबारा शुरू हुआ एग्रीग्रेटर ब्लॉगवाणी
कामयाबी उम्मीदें बढ़ाती है: विजेंद्र
मैडम फिजा कुछ तो तमीज सीखिए...
शर्मसार करता एक 'जनवादी' अखबार
भगवा ओढ़ने को बेकरार पीली छतरी वाले
जी की जय, बाकी चैनलों के लिए मंदी बनी शोषण का हथियार
अखबारों को ये क्या होता जा रहा है?
'हम न तो कोई जवाब देंगे और न ही उन्हें गालियां देंगे'
अब हिंदी में होगा डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू...
हिंदी ब्लॉग जगत को तोहफा, नया एग्रीग्रेटर 'ब्लॉग प्रहरी' लांच
नहीं रहे खबरों के शिल्पकार डॉ. रामकष्ण पांडेय
आर्थिक पत्रकारिता: बढ़ रही है 'अर्थ' की अहमियत
वीओआई शुरू, च्वाइस ऑफ इंडिया बनने की चाहत
हर चैनल की एक तमन्ना दिखना और बिकना है
हिंदुत्व के लिए अब कैसी जनक्रांति करेंगे कल्याण?
...तब गुरूजी जी पर ही इल्जाम क्यों?