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नहीं रहे खबरों के शिल्पकार डॉ. रामकृष्ण  

RKगाजियाबाद। हिंदी की प्रमुख समाचार एजेंसी यूनीवार्ता के पूर्व समाचार संपादक रामकृष्ण पांडेय का सोमवार को निधन हो गया। उन्हें दिल का दौरा पड़ने पर गाजियाबाद के नरेंद्र मोहन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। दो-तीन दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। डॉक्टरों ने उन्हें एंजियोप्लास्टी कराने की सलाह दी भी थी।

हिंदी न्यूज एजेंसी की दुनिया में समाचारों के स्वरूप, शिल्प और भाषा को एक नया विस्तार देने वाले डॉ. रामकृष्ण पांडेय इसी साल 31 जनवरी को यूनीवार्ता के समाचार संपादक पद से रिटायर हुए थे। डॉ. रामकृष्ण यूनीवार्ता में आने से पहले हिंदी की पहली न्यूज एजेंसी समाचार भारती से जुडे़ रहे। यूनीवार्ता से रिटायरमेंट के बाद सितंबर, 2009 में एक कांट्रेक्ट के जरिये यूनीवार्ता ने दोबारा डॉ. रामकृष्ण की सेवाएं लेनी शुरू कीं। इस बार उन्हें एजेंसी में आने वाले नए-नवेले पत्रकारों को खबरों की भाषा-शिल्प सिखाने और पत्रकारिता की ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके अलावा वह कई सामचार पत्रों और पत्रिकाओं में लगातार लिखते रहे। एक पत्रकार और संपादक के अलावा डॉ. रामकृष्ण साहित्यकार भी थे। उनके कई काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हीं में से एक था 'आवाजें'. दिल्ली के विश्व साहित्य संघ से प्रकाशित इस कविता संग्रह ने खासी प्रशंसा बटोरी।

RKSयूनीवार्ता में डॉ. रामकृष्ण के साथ काम कर चुके और अब वहां बतौर समाचार संपादक काम कर रहे विनोद विप्लव बताते हैं कि हमेशा आर्थिक संकट में घिरे रहने के बावजूद डॉ. रामकृष्ण ने ईमानदारी का साथ नहीं छोड़ा। मघुमेह और दिल की बीमारी से परेशान रहे लेकिन दोस्तों और परिवारवालों को अपने शरीर के अंदर पल रही विभीषिका की भनक नहीं लगने दी। परिजनों और पड़ोसियों ने शाम करीब आठ बजे जब डॉक्टर के पास चलने की जिद की तो यही कहते रहे अभी क्या है, सुबह डाक्टर को दिखा लेंगे। वह खुद सीढ़ियों से उतरे और उन्हें रिक्शे पर बिठा कर पास के श्रीकृष्णा अस्पताल ले जाया गया। शुरूआती जांच में ही डॉक्टरों ने उनकी हालत खराब होने का संकेत दे दिया। उन्हें फौरन गाजियाबाद के नरेन्द्र मोहन अस्पताल ले जाया गया। R

डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर के तकरीबन सभी मुख्य अंग बेहद खराब हो चुके हैं। बहुत देर हो चुकी थी, लिहाजा मौत ने उन तक पहुंचने में जरा सी भी देरी नहीं की। जो इंसान खुद सीढ़ियों से उतरा हो और रिक्शे पर बैठकर अस्पताल पहुंचा हो उससे जिंदगी ने महज दो घंटे में ही इतना बड़ा फरेब किया और हम जीवन और मौत के इस खेल का समझ नहीं सके।

गाजियाबाद के हिंडन घाट पर डॉ. रामकृष्ण का अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके बड़े भाई राम नारायण पांडेय ने दी। इस मौके पर यूनीवार्ता के तकरीब सभी मौजूदा कर्मचारी और कई पूर्व कर्मचारी मौजूद थे। वरिष्ठ पत्रकार आनंद स्वरूप शर्मा ने भी उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की तरफ से भी पुष्प गुच्छ भेजकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। डॉ. रामकृष्ण के परिवार में दो बेटियां और उनकी पत्नी हैं। एक बेटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है और दूसरी ग्रेजुएशन में है। दिवंगत पत्रकार और खबरों के इस शिल्पी को वॉयस ऑफ मीडिया की तरफ से भी श्रद्धांजलि।

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