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VOM Farewell

  • खामोश हुई ब्लॉगवाणी

    बंद हो गया हिंदी का नंबर वन ब्लॉग एग्रीग्रेटर 

    blogvani

    सभी हिंदी ब्लॉग्स को सहेजकर एक जगह पर मुहैया करवाने वाला यानी ब्लॉग एग्रीग्रेटर ब्लॉगवाणी बंद हो गया है। हिंदी ब्लॉग्स के नंबर वन एग्रीग्रेटर ब्लॉगवाणी का बंद होना ब्लॉगजगत के लिए एक सदमे की तरह है। महज दो साल के अंदर ये हिंदी का नंबर वन ब्लॉग एग्रीग्रेटर बन गया। समय-समय पर इसमें नई-नई चीजों का समावेश किया गया, जिन्हें ब्लॉगरों ने खूब पसंद किया। ब्लॉगवाणी टीम की पूरी कोशिश रहती थी कि इसे यूजर फ्रैंडली बनाया जाए। इसीलिए इसमें कई बार कुछ बदलाव भी किए जाते रहे, जिन्हें सबने सराहा। इसमें कोई शक नहीं कि ब्लॉगवाणी एग्रीग्रेटर सभी हिंदी ब्लॉगरों का चहेता था और इसका इस तरह अचानक बंद होना बहुत दुखद है। साथ ही यह संदेश भी है कि हिंदी के ब्लॉगर अभी मैच्योर नहीं हो पाए हैं। वो बार-बार ऐसी गलतियां दोहरा रहे हैं जिसकी वजह से ब्लॉग जगत को नुकसान हो रहा है। हिंदी ब्लॉगरों के लिए गूगल एडसेंस की सेवाएं बंद होने के बाद शायद यह दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले हिंदी ब्लॉगरों के गलत तौर-तरीकों, गूगल के विज्ञापनों पर फर्जी क्लिक और फर्जीवाड़े की घटनाओं की वजह से गूगल ने हिंदी ब्लागरों के लिए एडसेंस सर्विस बंद कर दी थी, जो अभी तक बंद है।

    फिलहाल ब्लॉगवाणी के बंद होने की जो वजह सामने आ रही है उससे यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ लोगों ने अपने ब्लॉग को लोकप्रिय साबित करने के लिए इसका दुरुपयोग किया है। इस बात से ब्लॉगवाणी को चलाने वाले इस कदर आहत हैं कि उन्होंने इसे बंद करने का फैसला ले लिया। ब्लॉगवाणी का बंद होना इसलिए भी दुखद है कि यह एग्रीग्रेटर कोई प्रॉफिट कमाने के मकसद से नहीं शुरू किया गया था। बल्कि इसका मकसद हिंदी ब्लॉगजगत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाना और ब्लॉगिंग को सर्वसुलभ बनाना था। यकीनन ब्लॉगवाणी अपने इस मकसद में कामयाब रहा। अब आप ब्लॉवाणी का यूआरएल इस्तेमाल करेंगे तो आपको ये पेज नजर आएगा, जिसमें ब्लॉगवाणी टीम ने एक संदेश छोड़ा है....

    अब ब्लागवाणी को पीछे छोडकर आगे जाने का समय आ गया है

    इसलिये आज जरूरी है कि ब्लागवाणी पसंद और उसमें बनाये गयी सुरक्षा तकनीकों के बारे में बताया जाये क्योंकि इसकी क्रेडिबिलिटी से उन सब ब्लागों की क्रेडिबिलिटी जुड़ी है जिन्हें पसंद किया गया है, और उन सब ब्लागरों की भी जो पसंद करते हैं. अगर आपने ब्लागवाणी पसंद का उपयोग किया हो तो यह देखा होगा कि एक पसंद देकर दोबारा दूसरी पसंद देने से नहीं होती. ऐसा सुनिश्चित करने के लिये कई मिली-जुली तकनीकों का इस्तेमाल किया गया था जिसमें IP Address, Cookies, Sessions आदि का इस्तेमाल होता है. इसलिये ब्लागवाणी की पसंद का दुरुपयोग साधारण प्रयोक्ता के लिये आसान नहीं था.

    ब्लागवाणी को सुचारू रूप से चलाना के लिये कई तकनीके और सिस्टम बनाये गये थे जिनसे उसके कामकाज में विराम न हो और वह निर्बाध रूप से चलती रहे. ब्लागवाणी का हर हिस्सा कई तरीके की सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल करता है, ब्लागवाणी पर आने वाली हर पसंद का पूरा हिसाब रखा जाता है. ब्लागवाणी पर आने वाली हर पोस्ट पर आने वाली हर पसंद का समय एवं IP address ब्लागवाणी के डाटाबेस में मौजूद है. पिछले कुछ समय में एसी ब्लाग पोस्ट आयीं जिनमें ब्लागवाणी की पसंद का दुरुपयोग करके बेबात बढती पसंद पर चिंता जताई गई थी. अपने इन्टरनेट कनेक्शन को बार-बार डिसकनेक्ट करके फिर से कनेक्ट कर IP बदल कर और ब्राउज़र में कैश मिटाकर या IP बदलने वाले औजरों का प्रयोग करके पसंद बढाने के बारे में बताया गया था.

    इन पसंदो का अध्ययन कर पाया गया कि नकली पसंद की IP में पैटर्न थे (जैसे सिर्फ आखिरी अंको का बदलना, आदि). एक सुरक्षा प्रोग्राम बनाया गया जो समय-समय पर चलकर इस पैटर्न को डिटेक्ट करके नकली पसंद निकालता है. अगर किसी ब्लाग पर निश्चित प्रतिशत से अधिक नकली पसंदे आयीं हों तो वह प्रोग्राम उस ब्लाग पर आने वाली पसंदे कुछ समय के लिये रोक देता है.
    सुरक्षा उपाय तभी ज्यादा कारगर होते हैं जब हैकरों को उनके बारे में पता न हो. इसलिये सुरक्षा उपाय हमेशा गुप्त रखे जाते हैं जिनके बारे में कोई पब्लिक अनाउंसमेंट नहीं की जाती. जानकारी सार्वजनिक करने का अर्थ है कि इनका तोड़ निकालने का साधन दे देना. दूसरे क्या ब्लागवाणी हर सवाल उठाने वाले ब्लागर की बढ़ी हुई पसंद की ip सार्वजनिक करती रहती ? यह अपमानजनक होता या सम्मानजनक? यह नकली पसंद किसी अन्य द्वारा भी तो की जा रही हो सकती थी. ब्लागवाणी के पास इन पसंदों की आईपी पता और समय मौजूद है.
    अंतत:
    ऐसा नहीं है कि हम सोचते नहीं हैं, या हमारी विचारधारा नहीं है. हमने कभी भी उनको अपने काम पर हावी नहीं होने दिया. ब्लागवाणी इसका सबूत कैसे दे? क्यों दे? ब्लागवाणी चलाना हमारी मजबूरी कभी न थी बल्कि इस पर कार्य करना नित्य एक खुशी थी. पिछले दो सालों में बहुत से नये अनुभव हुए, मित्र भी मिले. उन सबको सहेज लिया है, लेकिन अब शायद आगे चलने का वक्त है. तो फिर अब हम कुछ ऐसा करना चाहेंगे जिससे फिर से हमें मानसिक और आत्मिक शांति मिले. इन दो सालों में आप सबके हार्दिक सहयोग मिला इसके लिये बहुत आभार. अब ब्लागवाणी को पीछे छोडकर आगे जाने का समय आ गया है.

    विदा दीजिये ब्लागवाणी को,
    टीम ब्लागवाणी


    ब्लॉगवाणी बंद नहीं हो सकता!

    करा दी न ब्लॉगवाणी की भी फजीहत!

    ब्लॉगवाणी करता है पक्षपात ख़ास ब्लॉगरों के साथ: सबूत भी हैं 

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