अनेक विपरीत हालात के बावजूद कैसे रोजाना खबरें निकाल लाते हैं अखबार के रिपोर्टर। डेस्क पर आखिर घंटो क्या करते रहते हैं पत्रकार। चौबीस घंटे के समाचार चैनल में कैसे काम करते हैं लोग। कैसी है पत्रिकाओं में काम करने वालों की दुनिया। रेडियो में काम करने वालों का क्या है नजरिया। मीडिया की दुनिया में क्या-क्या हो रहा है पर्दे के पीछे। यही बताने की कोशिश करेंगे हम। हमारी कोशिश है, मीडियाकर्मियों की जिंदगी से जुड़े सुख-दुख को सबके सामने लाने की। उनके खट्टे-मीठे अनुभवों को आपसे बांटने की। इसी मकसद से वॉयस ऑफ मीडिया के जरिये हम आपसे मुखातिब हैं। हमारा वादा है, आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। हम हर हफ्ते टीआरपी बताने के लिए आपके सामने नहीं आएंगे, बल्कि हम साफ-सुथरी भाषा और संतुलित नजरिये के साथ बनेंगे मीडिया से जुड़े लोगों की आवाज।
संपादक
वॉयस ऑफ मीडिया
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न्यूज चैनल के लिए तत्काल चाहिए
मीडिया में नौकरी दिलाने वालों से सावधान
भविष्य के पत्रकारों का सामान्य (अ)ज्ञान
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का शार्ट कट
चैनल में अफेयर न होने का अफसोस
मत पीटिए मीडिया के 'प्रोफेशनल' होने का ढिंढोरा
शर्मसार करता एक 'जनवादी' अखबार
वह न्यूज चैनल का प्रोड्यूसर है
रेडियो मिर्ची की दिलचस्प कहानी